कोविड-19 के बाद, बढ़ेगा को-वर्किंग स्पेस का चलन

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लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से कोविड-19 के बाद को-वर्किंग स्पेस (Coworking Space) का सेक्टर sep 2020 में और तेज गति पकड़ सकता है। कभी नए उद्यमियों की जरूरत के तौर पर उभरे इस चलन को अब बड़ी कंपनियां भी अपना रही हैं। कॉर्पोरेट सलाहकार प्रीतेश आनंद की संस्था SPLAN के अध्ययन में यह बात सामने आई है।

को-वर्किंग ( Coworking Space ) का तरीका नया नहीं है, लेकिन पिछले कुछ साल में दुनियाभर में इसमें तेजी देखने को मिली है। निजी क्षेत्र तेजी से इसे अपना रहा है। 2021 में इस क्षेत्र में लगभग 40 करोड़ डॉलर (करीब 2,532 करोड़ रुपये) का निवेश होने का अनुमान है।

“अब को-वर्किंग स्पेस केवल नए उद्यमियों या फ्रीलांसर लोगों की पसंद नहीं रह गया है। छोटे उभरते उद्यमों के साथ-साथ अब बड़े कॉरपोरेट भी इसमें रुचि दिखाने लगे हैं।”

SPLAN के फाउंडर प्रीतेश आनंद का कहना है

फ्रीलांसर (Freelancer) लोग लागत बचाने के लिए इस विकल्प का चुनाव करते हैं। वहीं स्टार्टअप्स और छोटे व मझोले उद्यमी लागत के साथ-साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी ध्यान में रखकर इसका चुनाव कर रहे हैं।

बड़ी कंपनियों के इस दिशा में झुकाव की वजह अलग है। इन कंपनियों का फोकस कार्यस्थल तक अपने स्टाफ की पहुंच को आसान बनाने पर होता है। ऐसे में किसी प्राइम लोकेशन पर अपने स्टाफ को बैठाना कंपनियों की प्राथमिकता रहती है। इस दिशा में कंपनियां अब को-वर्किंग स्पेस मॉडल को अपनाने से भी गुरेज नहीं कर रही हैं।

बढ़ती लागत की वजह से कंपनियां काफी परेशान हैं और इसी को कम करने के लिए को-वर्किंग का ट्रेंड तेज़ी से बढ़ रहा है. पहली तिमाही के आंकड़ों की तरफ देखा जाए तो को-वर्किंग की मार्केट 25% बढ़ा है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सेक्टर में निवेश कितनी तेजी से बढ़ रहा है.

इस सर्विस की बात करें तो किसी भी प्लेयर को शांत वातावरण में बैठकर काम करने की सुविधा दी जाती है और साथ में बिजली कनेक्शन, वाइ-फाइ और पेंटरी की सेवा उपलब्घ है. महज 10,000-15,000 रुपये देकर आप को-वर्किंग स्पेस बुक कर सकते हैं. निवेश की बात करें तो फिलहाल Oplus Cowork, Smartworks, OYO, The Hive, Spring Board इस मार्केट में काफी एक्टिव हो चुके हैं.

नाइट फ्रैंक इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री सामंतक दास ने कहा कि भारत में केवल यह देखना ही रुचिकर नहीं है कि यह मॉडल कितनी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यहां यह बात भी ध्यान देने लायक है कि इसमें विविधता भी बढ़ रही है। कोविड-19 के बाद में यह विविधता और बढ़ेगी। यही वजह है कि इस मौके को भुनाने के लिए रियल्टी सेक्टर के बड़े खिलाड़ी भी इसमें दांव लगाने की तैयारी में हैं। कोविड-19 के बाद में कुछ दिग्गज फर्मो की दखल इस सेक्टर में देखने को मिल सकती है। भारत में अभी करीब 1.2 से 2 करोड़ सिटिंग की व्यवस्था वाले को-वर्किंग स्पेस की जरूरत महसूस की जा रही है। आने वाले दिनों में यह और तेजी से बढ़ने की है।

“टियर II टियर III शहरों में अभी भी एक ऐसे प्लेटफॉर्म की कमी है जहां निवेशक और इनोवेशन एक साथ आ सकें और आपसी लाभ के लिए काम कर सकें। बिहार में एक संपन्न स्टार्टअप इकोसिस्टम होने के लिए, स्थापित उद्यमियों और व्यापार मालिकों को सलाह और समर्थन देना होगा। “राज्य में एक ठोस, सहयोगी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए स्थापित उद्यमियों से एक मजबूत पुश और व्यापक सहयोग की जरूरत है।और यह तभी होगा जब सरकार सभी सेक्एटर के लिए अलग अलग कॉमन सर्विस प्लेटफार्म बनाय”

प्रीतेश आनन्द – कॉर्पोरेट सलाहकार

क्या है को-वर्किंग स्पेस मॉडल – Coworking Space Model

को-वर्किंग स्पेस मतलब एक ऐसा ऑफिस जिसमें एक से ज्यादा कंपनियों के लोग बैठते हों। शुरुआत में फ्रीलांसर उद्यमियों ने इस व्यवस्था को अपनाया था। किसी अच्छी लोकेशन पर अपनी उपस्थिति दिखाने के लिए एक केबिन या दो-चार कुर्सियों की जरूरत वाले उद्यमियों के लिए यह शानदार विकल्प बनकर उभरा। अब बड़ी कंपनियां भी रिमोट लोकेशन पर किसी बने-बनाए सेटअप में अपने स्टाफ बैठाने के लिए केबिन और डेस्क किराये पर लेने लगी हैं।

को-वर्किंग की सबसे बड़ी खासियत ये है कि कम लागत में आपको हर तरह की सुविधा मिल रही है. कम पैसे में आप अपना बिजनेस को खड़ाकर सकते हैं. ये मार्केट इसलिए भी काफी तेजी से बढ़ रहा है. क्योंकि निवेशकों को निवेश करने के लिए सही विकल्प नहीं मिल रहा है, क्योंकि ज्‍यादातर सेक्टर मंदी से जूझ रहे हैं. ऐसे में को-वर्किंग स्पेस निवेश के लिहाज से अच्छा मॉडल साबित हो रहा है. आने वाले समय में को-वर्किंग के अलावा को-लिविंग की मांग भी काफी तेजी से बढ़ रही है. अगले 1 साल तक को-लिविंग में भी जाने की योजना है.

दिल्ली-NCR के साथ साथ टियेर 2 और टियेर 3 शहरो में भी बढ़ रही है मांग

Oplus Cowork के फाउंडर प्रीतेश आनंद बताते है, “हमारे यहाँ अचानक मई और जून 2020 के महीने इन्क्वारी बड गई है, बड़ी बड़ी कम्पनिया भी अपने बड़े ओफ्फिसस को छोड़ कर कोवोर्किंग में अपना ऑफिस दुंद रही है. ” \

जैसा की हमे पता है, इंडिया (India) में ऑफिस (Office) के लिए जगह कितना महगा होते जरह है | और भारत में आपको पता होगा की पिछले 6 सालो में स्टार्टअप कल्चर (Startup Culture) कितनी तेजी से बाद रहा है| हमारे स्टार्टअप सबसे ज्यदा पैसा ऑफिस लेने के लिए लगाना पड़ता है|

ये समय में यह जरुरी है की इंडिया में ज्यदा से ज्यदा सस्ते ऑफिस उपलब्ध कराया जाये| जिससे हमारे स्टार्टअप, छोटे उद्यमी , फ्रीलांसर आसानी से ऑफिस ले सके और और अपना investment (निवेस ) Research and Development, Product development, सर्विसेज और मार्केटिंग (Marketing) पर लगा सके |

तब जा कर भारत में कोवोर्किंग स्पेस का चलन आया| जहा शहरों में कोवोर्किंग में यंगस्टर्स को मिल रहा है ‘ऑफिस स्पेस’ (Office Space), प्रति घंटे के हिसाब से भी कर सकते हैं बुकिंग

कोवोर्किंग (Coworking) जहा स्टार्टअप (Startup) को सस्ते में आपना ऑफिस मिल रहा है और साथ में बड़े Offices का सुबिधाये भी मिल रहा है ,

एक कोवोर्किंग के फायदे (Coworking Space)

  1. कांफ्रेंस रूम
  2. मीटिंग रूम 
  3. चाइल्डकेयर
  4. हाई स्पीड इंटरनेट 
  5. को-लिविंग अकॉमोडेशन
  6. लाइब्रेरी
  7. मार्केट स्पेस 
  8. पर्सनल लॉकर्स
  9. स्काइप रूम
  10. काम्प्लीमेंट्री वेबरेज 
  11. प्रिंटर्स, ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग

को-वर्किंग स्पेस  (Coworking Space) के साथ स्टार्टअप्स कस्टमाइज प्राइवेट ऑफिस (Private Office Space) भी बुक करा सकते हैं। इसमें अपनी सुविधा और जरूरतों के हिसाब से कस्टमाइजेशन कराया जा सकता है। अपनी टीम्स के साथ यहां २४ घंटे तक के लिए एक्सेस कर सकते हैं।

आज से समय में बहुत बड़ी बड़ी कंपनिया भी अपना ऑफिस कोवोर्किंग में ही चला रही है |

देश में लगभग सभी बड़े और छोटे शहरो में कोवोर्किंग की सुविधा है | कुछ बड़े नाम जो कोवोर्किंग की सुविधाए दे रही है

  1. WeWork – Gurugram, Mumbai
  2. Innov8 – Delhi/NCR, Chandigarh, Bangalore, Gurugram and Mumbai
  3. Awfis – Delhi, Bangalore, Hyderabad, Mumbai, Gurgaon, Noida, Kolkata, Pune.
  4. PlusOffices – Gurugram
  5. Oplus Cowork, Coworking Space Patna
  6. Social Offline –  Bangalore
  7. GoodWorks CoWork – 
  8. RentADesk – Hyderabad
  9. Qworky –  Lucknow
  10. WSquare – Chainai 
  11. Investopad – Gurugram
  12. The Office Pass – Gurugram

को-वर्किंग स्पेस में काम करना किसे पसंद है?

फ्रीलांसरों:

यह बताना गलत नहीं होगा कि साझा कार्यालय स्पेस फ्रीलांसरों के लिए दोनों दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बना सकता है। वे उन्हें अपने घंटे चुनने और अपना कार्यक्रम तय करने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। सह-कार्यशील स्थान लोगों के लिए समुदाय की भावना पैदा करते हैं जो अन्यथा घर से काम करने के लिए मजबूर होंगे।

प्रारंभ-अप: स्टार्टअप

ओपन-अप संस्कृति पर स्टार्ट-अप काम करता है, और सह-काम उन्हें लचीला होने का मौका देता है। ये स्थान सभी सुविधाएं प्रदान करते हैं, लेकिन उनके बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि वे उच्च लागत और प्रतिबद्धताओं के साथ नहीं आते हैं।

वर्चुअल ऑफिस क्या है?

एक आभासी कार्यालय एक अपेक्षाकृत नई अवधारणा है जो व्यवसायों को समर्पित शारीरिक कार्यालय स्थान को पट्टे पर देने की आवश्यकता के बिना कार्यालय का पता, संचार और प्रशासन सेवाएं प्रदान करता है, और बैठक के कमरे तक पहुंच प्रदान करता है। यह फ्रीलांसरों, डिजिटल खानाबदोशों और विभिन्न स्थानों से काम करने वाले उद्यमियों के लिए एक बेहतरीन कार्यक्षेत्र समाधान है, लेकिन इसके लिए व्यावसायिक पते की आवश्यकता होती है। इस तरह के सेटअप में आमतौर पर पार्सल, फैक्स सेवाएं और एक समर्पित व्यवसाय फोन नंबर शामिल होता है।

एक आभासी कार्यालय किराए पर लेने से, आपको एक वास्तविक कार्यालय किराए पर लेने के बिना एक भौतिक कार्यालय का लाभ मिलता है। एक आभासी कार्यालय एक व्यवसाय में विश्वसनीयता भी जोड़ता है।

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